Wednesday, September 10, 2008

प्रलयंकारी समाचार



प्रमोद
पिछले कुछ दिनों से कई समाचार चैनल लगातार ऐसे समाचार दिखाए जा रहे हैं जो उनकी समाज के प्रति जिम्मेदारियों को पीछे छोड़ते जाने का संकेत है। 'क्या होगा बुधवार को?' 'क्या धरती टूटेगी?' 'चलेगी महामशीन' जैसे समाचार इस प्रकार से दिखाए जा रहे थे मानो सबकुछ ख़त्म होने वाला है। 'लार्ज हेड्रोन कोलाइडर' से जुड़ी इस परियोजना पर जहाँ वैज्ञानिक विश्वास जाता रहे थे समाचार चैनल धमाकेदार खबरे बना कर प्रस्तुत करने में लगे थे। इसके सबसे ग़लत प्रभाव मैंने उन कम पढ़े मजदूरों पर देखा जो प्रतिदिन कमाकर खाते है। आज वे दिनभर अपने परिवार के साथ काम छोड़कर इस लिए साथ रहे क्योंकि यदि कुछ हो तो सबके साथ एक साथ हो।

चलिए! यह तो कम से कम आज हो रहे वैज्ञानिक महाप्रयोग के आधार पर अंदाजा लगाया जा रहा था पर उस समाचार का क्या कहा जाए जिसमे २०१२ ई० में संसार की समाप्ति की घोषणा की जा रही है। कहा जा रहा है कि माया सभ्यता की भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग की समाप्ति हो जायेगी। पृथ्वी समाप्त हो जायेगी और फ़िर से इसका निर्माण होगा। ये भविष्यवाणी सत्य हो या न हो ये सत्य है कि इसका बुरा प्रभाव चारों और दिखाई दे रहा है। चारों और इसीकी चर्चा सुनाई दे रही है। पढ़े लिखे लोग वैज्ञानिक सोच युक्त लोग भले इस ओर विशेष ध्यान न दे पर बच्चे और अन्धविश्वासी लोग इसपर गंभीर चर्चा करते दिखाई पड़ते है।
एक कहानी पढ़ा था कहीं जिसमे राजा को एक ज्योतिषी बताता है कि १२ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो जायेगी। राजा चिंता में घुलने लगा तथा राज-काज की अवहेलना करने लगा। उसके बुद्धिमान मंत्री ने राजा को सत्य से अवगत कराने के लिए भरे दरबार में ज्योतिषी से पूछा कि बताओ तुम्हारी आयु कितनी है? ज्योतिषी द्वारा लगभग ४० वर्ष और बताने पर तलवार से अगले ही क्षण उसका सर काटकर उसे मार डाला। फ़िर उसने राजा को बताया कि जब इसे अपनी आयु ही नही ज्ञात तो यह आपकी कैसे बता सकता है।

माया सभ्यता के द्वारा बनाये गए कैलेंडर में २०१२ ई० तक की ही तिथियों को देखकर यह अंदाजा लगा लेना कि इसके उपरांत पृथ्वी नष्ट हो जायेगी, प्रलय आ जाएगा आज के वैज्ञानिक युग में कितना उचित है यह तो मैं नही कह सकता मगर इसके प्रस्तुतीकरण के लिए जो तरीका अपनाया गया वह निश्चय ही उचित नही। '२०१२ के बाद धरती नही रहेगी', 'आएगा महाप्रलय' और न जाने क्या-क्या। यह समाचार कम और बॉलीवुड या हॉलीवुड की फ़िल्म का शीर्षक महसूस होता है। इस ख़बर पर बाजार में सी डी भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं। कोमल मानसिकता वाले बच्चे इस बात से बुरी तरह प्रभवित हो रहे हैं। उनपर इसके ग़लत प्रभाव को आँका नही जा सकता। मैंने कई बच्चो में इस ख़बर से जुड़े भय को महसूस किया। प्रलय हो या न हो इस प्रकार के समाचारों के प्रलयंकारी प्रभावों को नाकारा नही जा सकता।

क्या विडम्बना है कि यदि सच में भी किसी घटना का पूर्वानुमान सप्रमाण मिले तो मीडिया को चाहिए कि वह धैर्य से काम लेने को कहे , पर यहाँ तो ऐसी खबरों को धमाकेदार हॉलीवुड स्टाइल में प्रस्तुत किया जाता है और एक भय उत्पन्न करने का प्रयास भी किया जाता है।काश! समाचारों के प्रस्तुतीकरण से पहले उनके प्रभावों पर भी विचार कर लिया जाता।

7 comments:

Udan Tashtari said...

सहमत हूँ आपसे. पूरे देश को डरवा कर रख दिया.

नदीम अख़्तर said...

असल में समाचार चैनल में आज जो अधिकतर लोग (सभी नहीं) काम कर रहे हैं, उनके सोचने की क्षमता टीआरपी और मार्केट के भीतर ही सिमट कर रह गयी है. और एक सच्चाई तो यह भी है कि ज्यादातर चैनल चला रहे लोगों को राजस्व संचयित पत्रकारिता की नीति अपनानी है न कि उच्च कोटि की पत्रकारिता के माध्यम से अर्जित होने वाले लाभ से इस पेशे को आगे बढ़ाना है, फर्क यहीं आ जाता है. जो लोग पत्रकारिता के माध्यम से धन कमाने को ही अपनी प्राथमिकता सूची में रखेंगे, उनसे बददिमागी के अलावा और क्या अपेक्षा की जा सकती है. एक उद्हारण ले लीजिये : धोबी के पास जब महंगे और उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े जाते हैं, तो वह सिर्फ़ उन कपडों की गन्दगी दूर करने पर ध्यान देता है, पटक पटक कर फींचता है कपडों को. यदि धोबी कपडों की गुणवत्ता पर ध्यान दे तो वह बहुत ही कोमलता के साथ भी कपडों को धो सकता है, लेकिन इस काम में उसका समय जाया हो जाएगा, जिसके चलते वह ज़्यादा कपड़े धो नहीं पायेगा. इसलिए देता है धोबिया पछाड़. आज के टीवी चैनल के पालनहार किसी जाहिल धोबी से कम नहीं हैं.

komal kumari said...

yes. these TV channesl's are creating and spreading havoc among people. is in't there any way to stop them?

Anonymous said...

प्रलय या फ़िर किसी प्रकार से धरती के खत्म होने की पूर्व सूचना कभी किसी को नही मिल पायेगी, इतना तय मानिये. आप ज़रा सोच के देखिये की आज कितने भूकम्पों, बाढ़, अकाल या प्राकृतिक आपदा की पूर्व सूचनाएं मिल पाती हैं. और विज्ञान इतना सक्षम है कि वह भविष्यवाणी के दुकानदारों से पहले ही अन्नौंसमेंट कर देगा कि कब क्या हो सकता है. कृपया भविष्यवाणी करने वालों से उनकी आयु पूछ लें, जैसा प्रमोद जी ने अपने लेख में एक कहानी का उल्लेख किया है...

पंकज त्रिपाठी said...

ई भविष्यवाणी-ताविश्यवानी सब फालतू बात है. कम्बल ओढ़ के घरे सुतिये कुछो नही होगा.

vikas singh, bhopal said...

pramod bhai, sach me ye news channel waale sara kooda-kachra hum logon par hee fenk rahe hain. bhagwan se prarthana kijiye ki hum logon ko kisi prakar bacha le in channel waalon se. hari om.... hari ommm

bhoothnath said...

darasal t.v.cainalo ki desh aur samaj ke prati koi jimmevari tode hi hai !! yah to loktantra ka ek esa chautha khamba ban chuka hai,jiski mansha baki ke charon khambhon ko ukhaad fekne kee hai!apni jimmewariyo ke prati sabse jyada gair jimmewar hain t.v.chainal!!inhe kya fark padta hai ki inke dikhaye ja rahe programo ka kispe kya asar padta hai?kaun bhyabhit hota hai?ya bacche ku-sanskari bante hain !!desh ya samaj chulhe me jata hai to jaye inki bala se !!!!