Tuesday, March 24, 2009

व्योम के पार से लौट कर ........!!

तेरे हरफ़ो के अर्थों में मुझे खो जाने दे...
इक ज़रा मुझको खुद में ही खो जाने दे!!
सामने बैठा भी नज़र ना आए तू मुझे
ऐसी बात है तो मुझको ही चला जाने दे !!
तेरी मर्ज़ी से आया तो हूँ अय मेरे खुदा
अपनी मर्ज़ी से मुझे जीने दे,चला जाने दे!!

आँख ही आँख से बातें दे करने दे तू मुझे
साँस को साँस से जुड़ने दे उसे समाने दे!!
इक जरा जोर से दिल को मिरे धड़कने तो दे
इक
जरा जोर से मुझे आज तू खिलखिलाने दे !!
मुझको मेरी ही कीमत ही नहींपता "गाफिल"
इक तिरे सामने महफ़िल अपनी जमाने दे!!

3 comments:

अल्पना वर्मा said...

क्या बात है! बहुत सुन्दर भाव प्रधान रचना है. शुक्रिया.

श्यामल सुमन said...

बहुत खूब। कहते हैं कि-

सरूर-ए-इल्म है किसी शराब से बेहतर।
कोई रफीक नहीं है किताब से बेहतर।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

रंजना said...

Waah !! Kya baat Hai....

sundar bhavabhivyakti...