Tuesday, October 27, 2009

एक कविता जो सोचने को मजबूर कर दे

डॉ भारती कश्यप ने यह मार्मिक स्लाइड शो प्रेषित किया है, जो बताती है कि आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में हम अपने दोस्तों और जाननेवालों से किस कदर दूर होते चले जा रहे हैं। क्या हम स्वविकास की अंधी दौड़ में शामिल हो गये हैं। सोचिये और हो सके तो इसके निहितार्थ को समझते हुए अपनों से दूर होने की जो कोशिश हो चुकी है, उस खाई को पाटने की दिशा में आगे बढ़िये।



5 comments:

अजय कुमार said...

But tomorrow comes and tomorrow goes,

And distance between us grows and grows

very true lines

पी.सी.गोदियाल said...

Buetiful poem,

a few lines of a similar type poem i can recall;

Ever lost touch,
Let a good friendship die
Cause you never had time
To call and say "Hi"?
You'd better slow down.
Don't dance so fast.
Time is short.
The music won't last.

रंजना said...

सुन्दर प्रस्तुति....

भारती जी को हिंदी में लिखने को प्रोत्साहित करें...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

वाकई, सचमुच सम्प्रेषणीय। आभार।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

वाकई, सचमुच सम्प्रेषणीय। आभार।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }