Tuesday, September 14, 2010

थर्ड क्लास चुलबुल पांडेय


मैं काफी दिनों से फिल्म नहीं देख रहा था। कल अचानक दोस्तों ने जबर्दस्ती मुझे बारिश के बावजूद कार में बिठा लिया और ले गये सनीमा हॉल। सलमान खान की फिल्म दबंग का प्रदर्शन चल रहा है। मैंने वैसे तो बहुत सारी थर्ड क्लास फिल्में देखी हैं, लेकिन हाल फिलहाल की सबसे खराब फिल्म कल दबंग के रूप में देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ। फिल्म में संवाद से लेकर अदाकारी तक और आइटम सॉन्ग्स से लेकर मगजमारी तक, सबकुछ घटिया स्तर का था। सलमान खान तो जैसे ठान कर ही बैठे हैं कि उनका असली दर्शक वर्ग वही है, जो गांजा टान कर बैठता है और जिसे दीन-दुनिया से कोई वास्ता नहीं रहता। मतलब उनका टार्गेट पिछले दस वर्षों से एकदम निचला तबका है, जो फिल्म के माध्यम से कोई संदेश नहीं चाहता। वह चाहता है, नाच-गाना, मार-काट, फूहड़ संवाद और तीन घंटे तक अकारण सीटी बजाने, ताली पीटने का मौका। सलमान खान की अदाकारी तो निम्न स्तरीय है ही, वे बहुत ज्यादा (ओवर) कॉन्फिडेंट भी दिखते हैं। उनका प्रोफेशनल अतिवाद उनकी इस फिल्म में भी दिखा। मां के मरने पर जैसे रोने की अदाकारी होनी चाहिए, वो तक उनसे नहीं निभाया जाता, तो ये काहे के एक्टर। लेकिन वाह रे पब्लिक किसी को कुछ मतलब नहीं कि सामने वाला कितना उल्लू बना रहा है। सांय-सांय सीटी मारे जा रही थी हमारी युवा पीढ़ी और मैं सोच रहा था कि इस भीड़ को एक निम्न स्तरीय फिल्म के माध्यम से होशरहित किया जा सकता है, तो अगर कुछ ज्यादा का वादा मिल जाये, तो ये युवा पीढ़ी, जहां बोलिया वहां आग लगाने को तैयार हो जायेगी। उद्देश्यहीन, दिशाहीन और संदेशरहित फिल्म दबंग में न तो सलमान और न ही अरबाज़ खान कोई अदाकारी दिखाने में सफल रहे और न ही उन्होंने फिल्म की पैकेजिंग ही ठीक से की। फिल्म की नायिका शत्रुघ्न सिन्हा की सुपुत्री सोनाक्षी सिन्हा की भी कोई भूमिका नहीं थी। उन्हें बमुश्किल दस-पंद्रह लाइन बोलते सुना गया। आधी फिल्म में तो उन्हें सीरियस दिखाया गया, जिनका "कलमूही" होने का रहस्य अंत तक रहस्य ही रह गया। लगता है डायरेक्टर भूल गये कि दर्शक इसे भी जानने की इच्छा रखेंगे। मतलब फिल्म इतनी बुरी तरह से अव्यवस्थित थी कि उसके बारे में चर्चा करना ही टाइम पास करना होगा। ये फिल्म उन लोगों के लिए एकदम सटीक है, जो किसी प्रकार दो-ढाई घंटे गुजारने के लिए सिनेमा हॉल जाते हैं, वो भी होश खोने के बाद। वैसे इस फिल्म को देखने के बाद सलमान खान को लेकर मेरा विश्वास और भी मजबूत हो गया- वे कल भी सी ग्रेड, आज भी सी ग्रेड हैं और आगे सुधर जायें, तो दैवीय शक्ति को ही जिम्मेदारी जायेगी।

3 comments:

sunil said...

kya karogo bhai.itni masala film me sirf bewkoof hi banaya gaya hai.director mano ye samajh raha hai ki samne wala idiot hai.

नीरज गोस्वामी said...

इस फिल्म की सफलता एक बार फिर सिद्ध करती है के भारतीय दर्शक कितने मूर्ख हैं...
मूर्खों को मूर्ख बनाना गुनाह नहीं...मूर्ख बना कर अगर पैसे कमाए जा सकते हैं तो इसमें निर्देशक कलाकार का क्या दोष...

नीरज

Anonymous said...

sahi baat matlab ki khud to kuch se hota nahi aur chale doosron ko gyan baantne, waise bhi gyan har koi baantta hai aapne kiya to kya galat kiya lage rahiye.