Sunday, November 11, 2012

नायपाल ने खुद को भारतीय कब माना

................. उन्होंने खुद को भी भारतीय नहीं माना और यदि माना भी तो एक विचित्र रूप में । उनके वक्तव्य प्रायः विरोधभासी रहे जैसे एक तरफ उन्होंने माना कि उन्हें हिन्दुस्तान की राजनीति में कोई रूचि नहीं जबकि दूसरी तरफ वो हिन्दुस्तान को एक हिंदू राष्ट्र का दर्जा देने के हिमायती रहे और मुस्लिमों के कट्टर विरोधी रहे। वो मानते हैं कि मुस्लिमों ने हिन्दुस्तान को भ्रष्ट कर दिया।
...................भारतीय साहित्यकारों का एक धड़ा गाँव में कभी ना जाकर ना सिर्फ ग्रामीण जीवन पर उपन्यास लिख रहा है बल्कि पुरूस्कार भी प्राप्त कर रहे हैं, या विदेशी पृष्ठभूमि पर बेहिचक लिखकर वाह वाही लूट रहे हैं...................
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नायपाल ने खुद को भारतीय कब माना

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
त्यौहारों की शृंखला में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भाईदूज का हार्दिक शुभकामनाएँ!