Tuesday, March 29, 2016

बेमौत मरते सैनिक और फर्ज़ी राष्ट्रवाद

बेमौत मरते सैनिक और फर्ज़ी राष्ट्रवाद

जितने सैनिक हर साल आतंकवादियों से लड़कर नहीं मरते, उससे ज्यादा आत्महत्या कर मरते हैं
2000 से 2012 के बीच 12 साल में 3987 सैनिक मारे गए, जबकि, इस दौरान हमने युद्ध एक भी नहीं लड़ा।

2004-13 के दस सालों में खेत में अनाज उगाने में लगे – 1,58,865 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए।

जम्मू कश्मीर में 2013 में, 24 जवानों ने आत्महत्या की, वहीं 15 जवान आतंकवादियों से मुठभेड़ में मारे गए

.....जरूर पढ़ें पूरा लेख....इसलिंक पर.........
http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/2016/03/29/%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A5%E0%A5%8B%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%B0#.VvoFIvl97IU


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1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (30-03-2016) को "ईर्ष्या और लालसा शांत नहीं होती है" (चर्चा अंक - 2297) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'