Friday, June 27, 2008

संगीत के जादूगर : पंचम दा


आज पंचम दा का जन्मदिन है। मदहोश कर देने वाली उनकी संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलोदिमाग पर छाई हुई है। 27 जून 1939, कोल्कता में महान संगीतकार एस डी वर्मन को राहुल देव वर्मन पुत्र रत्न के रूप में प्राप्त हुए। इनका पंचम नाम होने के पीछे एक कहानी है। बचपन में ये जब रो रहे थे तो महान कलाकार अशोक कुमार ने इनका रुदन सुना और वे बोले इसके रुदन में संगीत है और रोने पर सरगम के पांचवे स्वर पा का सुर निकल रहा है। तब से ये पंचम बन गए। मुंबई में आने के बाद महान सरोदवादक उस्ताद अली अकबर खान से इन्होने सरोद की शिक्षा ली। अपने सत्रहवें वर्ष के पायदान में पहुंचते ही वे अपनी पहली संगीत रचना की। गाना था, ऐ मेरी टोपी पलट के आ, फ़िल्म थी सरफ़रोश। फ़िल्म छोटे नवाब में बतौर संगीतकार उन्होंने अपने करियर का आगाज किया और 4 जनवरी 1994 को मौत की आगोश में जाने तक संगीतप्रेमियों के दिलों पर राज किया। 1982 में सनम तेरी कसम, 1983 में मासूम तथा 1994 में 1942 लव स्टोरी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। वे ऐसे संगीतकार थे जिन्होंने पश्चिमी और भारतीय संगीत का सफलतापूर्वक मिश्रण किया और आज भी वे के संगीतकारों के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। उनके संगीत निर्देशन में किशोर कुमार, उनकी पत्नी आशा भोंसले, लता मंगेशकर, मन्ना डे जैसे महान गायकों ने अपनी आवाज दी तथा मदमस्त करने वाली गानों से दुनिया को परिचय करवाया। उनकी संगीत रचनाओं में संगीत के सभी रसों स्वाद मिलता है जिनमे दर्द भरे नगमे, सदाबहार रोमांटिक गाने तथा मस्ती भरी हास्य गाने शामिल है। उनकी सफल फिल्मो के फेरहिस्त काफी लम्बी है, जिनमे तीसरी मंजिल, यादों की बारात, अमर प्रेम, पड़ोसन, हरे रामा हरे कृष्णा , सागर, इजाजत आदि प्रमुख है। अमर प्रेम का ए गाना चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये, पड़ोसन की मेरे सामने वाली खिड़की में कोई चाँद का टुकड़ा रहता है, इजाजत फ़िल्म का गाना मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है, मासूम का तुमसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूँ में। वे अपनी अंतिम फ़िल्म 1942 लव स्टोरी में भी अपनी जादूगरी दिखाई।
पंचम दा बिना आज संगीत जगत अधूरा महसूस कर रहा है। हमारी टीम के तरफ़ से उनको शत शत नमन।
विकास कुमार


2 comments:

सचिंद्र राव said...

pancham da ke favour me ek bat aur kahana chahunga ki unka sangeet aaj ke sangeet se kafi age hai isliye to unke geeto ki popularity dino din aur bhi badti ja rahi hai. apne unki kai bemisal geeto ka jikar nahi kiya jo unhe sabse pratibhashali hone ka praman prastut karate hai.

Rajat Kr Gupta said...

यह इन्टरनेट भी अजीब दुनिया है. रांची हल्ला जिस तरीके से इसका इस्तेमाल कर रहा है वैसा अगर सभी करें तो भारतीय पत्रकारिता को बहुत लाभ होगा. खासकर समाज से जुडे सभी विषयों पर लोग लिख रहे है.