Wednesday, July 29, 2009

आईये दोस्तों !!करें देश की इज्ज़त की नीलामी....!!

आईये दोस्तों !!करें देश की इज्ज़त की नीलामी....!!

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
आईये ना प्लीज़ आप भी यहाँ,
हम आपकी भी नुमाईश कर देंगे!!
बेशक आपने खोले नहीं हों अपने कपड़े बाथरूम में भी कभी
लेकिन हम आपको यहाँ बिल्कुल नंगा कर देंगे!!
हम यहाँ सबका सामना सच से कराते हैं
बेशक इस सच से हम सबको अधमरा कर देंगे !!
नई लाइफ-स्टाइल में कुछ भी गोपनीय नहीं होता
हर कोई एक बार कम से कम अधनंगा तो होना ही चाहिए !!
और हर सच भले ही चाहे कितना ही कुरूप क्यूँ ना हो
उस भयावह कुरूपता को परदे पर उजागर क्यूँ नहीं होना चाहिए??
परदे पर कुरूपता सुंदर-वैभवशाली और परिपूर्ण लगती है!!
इसलिए हर कुरूपता को खोज-खोज कर हम इस परदे को भर देंगे !!
भारत के तमाम भाई और बहनों
अब भी तुम सबमें कुछ तमीज-संस्कार और परम्परा यदि बाकी बची है
तो यहाँ आओ, इस तमीज की कमीज हम ही उतारते हैं!!
सभ्यता नाम की कोई चीज़ अगर आदमी में बाकी बच रही है,
उसे इन्हीं दिनों में ख़त्म होना होना है !!
ये बात बाबा"........"जी बता कर गए हैं !!
अरे भारत-वासियों,अब तो आप सच से मुकर मत जाना !!
और गली-गली से-हर नाली और पोखर से गंदे-से-गंदे
हर सच की बदबूदार सडांध को ढूँढ-ढूँढ कर इस मंच पर लाना !!
हम सच बेचते हैं,जी हाँ हम सच बेचते हैं!!
सच के साथ हम और भी बहुत कुछ बेचते हैं!!
ईमान-धरम की बात हमसे ना कीजै,
ये सब कुछ तो हम मज़ाक-मज़ाक में ही बेच देते हैं...!!
तो फिर साहिबान-कद्रदान-मेजबान-मेहमान !!
आज और अभी इस मंच पर आईये,
और हमसे मज़ाक का इक सिलसिला बनाईये,
और अपनी इज्ज़त के संग ख़ुद भी बिक जाईये!!
नोट-देश की इज्ज़त की नीलामी फ्री गिफ्ट के रूप में ले जाईये !!

4 comments:

Suresh Chiplunkar said...

उम्दा, उम्दा ले्ख। नाली में से एक-एक बाल्टी भरकर परिवार में होली खेलने को आतुर हो रहे हैं "सेलेब्रिटी"…

सतीश सक्सेना said...

बहुत बढ़िया भूत नाथ जी !! शुभकामनाएं

Science Bloggers Association said...

अच्‍छा व्‍यंग्‍य।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

'अदा' said...

भूतनाथ जी,
आपने सचमुच ही सच दिखा दिया, सही कहा आपने लेकिन क्या यह सचमुच 'सत्य' है जिसे लोग दिखा रहे हैं ? नहीं यह 'सत्य' नहीं है यह है उनके चरित्र की गलीज,यह उनकी आत्मा का घिनौना रूप है, जिसे वो सबके सामने बता कर, दिखा कर साबित कर रहे हैं की वो सच्चे हैं, इसे 'सत्य' नहीं कहते इसे 'पाप' कहते हैं, और 'पाप' का प्रायश्चित किया जाता है, उसको glamaraized नहीं क्या जाता है,...
बचपन में पढ़ा था 'सच बोलो, लेकिन प्रिय बोलो, अप्रिय सच मत बोलो' .... पता नहीं इस भयानक और वीभत्स कार्यक्रम से क्या होने वाला, क्या हया की एक झीनी सी भी परत नहीं बचेगी अब ???