Wednesday, April 7, 2010

आसमान तुम्हे देख रहा है !!

आसमान तुम्हे देख रहा है !

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
ऐय मित्र
आसमान तुम्हे देख रहा है
गर्दन ऊपर उठाओ,आँखे ऊँची करो
ऊपर देखो कि सारा का सारा दिन
टकटकी लगाये यह आसमान तुम्हे देख रहा है!!
शायद तुम्हे यह तो पता ही होगा कि
तुम्हारे होने के बहुत-बहुत-बहुत पहले भी
बहुत-बहुत-बहुत कुछ गुजर चूका है आसमान के नीचे,
आसमान ने देखी है आसमान के नीचे होने वाली
तुम्हारे ईश्वरों की सारी भगवतलीलाएं और
तमाम संत-महात्माओं को भी देखा है आसमान ने !!
धरती के सभी सिकंदरों के हश्र का गवाह है आसमान
लेकिन यह भी सच है कि इसने कभी किसी को कुछ नहीं कहा है
जिसने जो किया,उसे देखा भर है किसी साक्षी की तरह
अगर तुम अपनी किसी भीतरी नज़र से आसमान को देखो-
तो सुनाई देंगी तुम्हे उसकी अस्फूट ध्वनियाँ
और उन ध्वनियों में अन्तर्निहित सारगर्भित अर्थ !!
आसमान तुम्हारी तरह शब्द नहीं बोलता-
लेकिन जब वह बोलता है-
तो ऐसा नहीं हो सकता कि तुम, "तुम" रह जाओ !!
आसमान को अगर तुम महसूस कर पाओ
तो वह तुम्हे "तुम" नहीं रहने देता,
जो कि तुम हो भी नहीं, और आसमान पर
प्रत्येक क्षण तुम्हारी पदचाप लिखी जा रही है !!
आसमान पर लिखा हर इक हर्फ़ अमिट है और
हर क्षण इक नया निशां बनता जा रहा है,
तुम्हारे अपने ही हर कर्म से,कर्मों की श्रृंखला से-
कर्म का फल मिल जाना ही कर्म का ख़त्म हो जाना नहीं है
कर्मफल के बाद भी कर्म है और उसके के उसके बाद भी कर्म !!
कर्म तो अनंत कर्मों की एक अंतहीन झड़ी है
और तुम-सब (हम) उसकी इक छोटी-सी कड़ी !!
तुम अपने से ठीक पहले वाले बुलबुले के ठीक बाद के बुलबुले हो !!
और तुम्हारे बाद के बुलबुले तुम्हारी खुद की संतानें !!
ए मित्र-
इसलिए तुन्हारे कर्मों में ही सन्निहित है-
तुम्हारी अपनी ही संतानों का आगत,भविष्य !!
तुम जो कुछ यहाँ पर कर रहे हो-
उससे निश्चित हो रहा है तुम्हारी संतानों का भी कर्मफल,
इसलिए मेरा तुम्हे यह बताना भी तो फिजूल ही होगा-
कि तुम्हे धरती पर अपने बच्चों के लिए क्या करना चाहिए;
धरती को बचाने के लिए क्या करना चाहिए,
और धरती को स्वर्ग बनाने के लिए क्या.....!!??
तुम जानो-ना जानो....देखो-ना देखो....मगर
आसमान तुम्हे देख रहा है-तुम्हारे ही कहीं भीतर से

4 comments:

Jandunia said...

बहुत सुंदर रचना, पसंद आई।

Udan Tashtari said...

तुम जो कुछ यहाँ पर कर रहे हो-
उससे निश्चित हो रहा है तुम्हारी संतानों का भी कर्मफल,


-इतना समझ जायें लोग तो दुनिया स्वर्ग हो जाये.

बहुत उम्दा बात कही है भूतनाथ.

संजय भास्कर said...

भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
सुंदर रचना....

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

बेचैन आत्मा said...

कर्मफल के बाद भी कर्म है और उसके के उसके बाद भी कर्म !!
तुम अपने से ठीक पहले वाले बुलबुले के ठीक बाद के बुलबुले हो !!
तुम जो कुछ यहाँ पर कर रहे हो-
उससे निश्चित हो रहा है तुम्हारी संतानों का भी कर्मफल

--कई पंक्तियाँ कट-पेस्ट कर डालीं मैने यहाँ भी और अपने ह्रदय में भी.
यहाँ वाला तो नहीं मिटेगा देखें दिल कितना साथ देता है!
--प्रेरक विचार प्रस्तुत करने के लिए आभार।