Tuesday, July 22, 2008

भावनाओं से ही उपजता है....PASSION

विष्णु राजगढिया जी, मेरा लेख पढने के लिए धन्यवाद। मैं कहना चाहूंगी कि जीवन के हर क्षेत्र में मानवीय भावनाएं अहम भूमिका निभातीं है। यही भावनाएं नहीं हैं, इसलिए तो हमारी राजनीति संवदेनहीन हैं। मै कल लोकसभा की कार्यवाही देख रही थी। यह भी देखा कि कितने संवेदनहीन हमारे नेता हैं। ऐसा इसलिए है कि नेताओं को लोगों की भावनाओं की कद्र नहीं है। मैं हाल ही में देष की चुनिंदा डॉक्टरो के बीच लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने मुंबई गयी थी। एक वर्ष तक चले इस कार्यक्रम में डॉक्टरों को तकनीकी विषेशज्ञता के अलावा समाज के अंदर नेतृत्वकारी दक्षता के हुनर सीखाये जा रहे थे। इसी कार्यक्रम में देश के जाने माने मोटीवेषनल स्पीकर नंदन सवनाल की बातें मुझे आज भी याद हैं कि इमोषन प्ले ग्रेट रोल इन कॉरपरेट वर्ल्ड। (EMOTION PLAY GREAT ROLE IN CORPORATE WORLD).इसलिए मैं कहतीं हूं भावनाओं के बिना देश सेवा हो सकती है, ही गरीबों की सेवा और ना ही आपमें किसी बड़े उपक्रम को विघ्न बाधाओं के बावजूद लगाने का साहस पैदा हो सकता है। इसलिए जो पैशन चाहिए वो भावनाओं से ही उपजता है।

डॉ भारती कश्यप

1 comment:

Rajiv Kumar said...

I have read the aricle of Dr. Bharti, comment of Vishnu Rajgadia and again the comment of Dr. Bharti. I dont see any contradiction between the article of Dr. Bharti and the views of Mr. Rajgadia. In my opinion, the comment of Mr. Rajgadia was just to take forword the imotions of Dr. Bharti and we should must learn how to transform our dreams and imotion in reality. Thanks to all participating in the discussion on the health of the "poor" poor