Thursday, August 28, 2008

हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के

शब्द ही ब्रम्ह हैं ,शब्द ही नाद हैं
शब्द ही सत्य हैं,शब्द सर्वस्व हैं
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के
शब्द से गीत हैं ,शब्द से मीत हैं
शब्द से प्रीत है, शब्द से जीत है
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के
शब्द हैं काफिया ,शब्द ही हैं रदीफ
शब्द से नज्म है, शब्द में वज्न है
हम राहगीर हैं, शब्दों के सफर के
शब्द हैं शाश्वत ,शब्द अंतहीन हैं
शब्द ही हैं प्रकृति ,शब्द संसार हैं
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के
शब्द सरोकार हैं ,शब्द ही प्यार हैं
शब्द त्यौहार हैं ,शब्द व्यवहार हैं
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के
शब्द ही हैं किताब, शब्द ही ग्रंथगार
शब्द ही हैं नियम, शब्द सरकार हैं
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के

शब्द हैं शीर्षक , शब्द ही वाक्य हैं
शब्द ही भाषा का अभिसार हैं
हम राहगीर हैं ,शब्दों के सफर के


शब्दों के राही
विवेक रंजन श्रीवास्तव
सी 6 , विद्युत मंडल कालोनी , रामपुर , जबलपुर
मो. 09425484452
मेल vivek1959@yahoo.co.in
blog http://vivekkikavitaye.blogspot.com

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

नदीम अख़्तर said...

vivek jee jaari rakhiye shabdon kee yatra, hum sab ki subhkamnayen hain

SACHIN JAIN said...

shabdo ka khoobsoort warnan