Sunday, June 21, 2009

रांची विवि = देख तमाशा देख


रांची विश्वविद्यालय जैसा प्रतिष्ठित स‌ंस्थान अगर स‌ंबद्ध स‌ूचनाओं की मुकम्मल जानकारी अपने वेब-साइट के माध्यम स‌े देने में असफल रहे, तो फिर किस स‌ंस्थान स‌े ऎसी उम्मीद की जा स‌कती है। रांची यूनिवर्सिटी के स‌ाइट में न तो भावी परीक्षाओं की तिथि की पूरी जानकारी है और न ही रांची विवि द्वारा स‌मय स‌मय पर जारी होने वाले स‌र्कुलर/आदेश/निर्देश की ही प्रति उपलब्ध करायी गयी है। ऎसा लगता है कि तकनीकी दृष्टिकोण स‌े स‌ाइट बनाकर केवल खानापूर्ति कर दी गयी है। चूंकि रांची विवि एक स‌रकारी स‌ंस्थान है, इसलिए इसमें इस तरह की विमूढ़ता के प्रदर्शन को शैक्षणिक अपराध भी कहना गलत नहीं होगा। मैंने आज इस स‌ाइट स‌े कुछ परीक्षाओं की जानकारी लेने की कोशिश की, तो देखा कि इसका मेंटेनेंस‌ ही लगभग शून्य है। शुरुआत में अगर कुछ हुआ होगा, तो हुआ होगा, बाद के दिनों में इसे छोड़ दिया गया है। इस बारे में जब स‌ाइट मेंटेन करनेवाली कंपनी स्पीड स‌ॉल्यूशन के प्रतिनिधि स‌े बात की गयी, तो उन्होंने बताया कि रांची विवि की ओर स‌े अगर उन्हें कोई जानकारी दी जाती है, तो वे उसे डालते हैं लेकिन वे खुद स‌े विवि स‌े जबर्दस्ती नहीं कर स‌कते। रांची विवि को यह जरूर स‌ोचना चाहिए कि आखिर ऎसी उदासीनता के जरिये हमलोग क्या स‌ंदेश देना चाहते हैं स‌माज को और भावी पीढ़ी को। गौर करें और हो स‌के तो लुटती हुई गरिमा को वापस लाने में जी-जान लगा दें।

3 comments:

मोनिका गुप्ता said...

सरकारी संस्थानों की बेफेक्री की बिल्कुल सही तस्वीर पेश की है आपने। वैसे भी काम हो चाहे न हो पैसा तो साइट के नाम पर हमेशा मिलता ही रहता है। विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह की लापरवाही कोई नयी बात नहीं। सरकारी माल को अपना कहने वाले लोगों की कमी नहीं जिसका खर्च बिल्कुल उसी तरह किया जाता है जिस तरह राम नाम जपना पराया माल अपना वाले करते है। अब साइट पर लेटेस्ट जानकारी दी जा रही हो या नहीं लेकिन साइट मेंटेनेंस के नाम पर विश्वविद्यालय कोष से महीना हजारों रुपये की निकासी तो जरूर होती होगी। इसलिए आज लुटो खसोटो की मानसिकता में इमानदारी की उम्मीद करना बेवकूफी है। खासकर सरकारी संस्थान में काम करने वाले की भी कमी नहीं जो विश्वविद्यालय, कॉलेज और कार्यालय का दोहन करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

स्वप्न मंजूषा शैल said...

नदीम,
बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने, मोनिका जी की बातों से मैं शत-प्रतिशत सहमत हूँ
रांची विश्वविद्यालय की वेब-साईट के मेंटेनेंस‌ करने वाली कम्पनी से ये भी पूछना चाहिए की इस साईट की मेंटेनेंस‌ के लिए उन्हें कितना रुपैया दिया जा रहा है, और उस रुपैये की निकासी के लिए वो विश्वविद्यालय के साथ जबरदस्ती करते हैं या नहीं,
पता नहीं आज तक रांची विश्वविद्यालय चल कैसे रहा है, आज तक एक भी सत्र की परीक्षा समय पर नहीं हुई है, कुछ काम नहीं होता है, नदीम, आप लोग ही इसे सुधर सकते हैं , कुछ कीजिये

विनीत कुमार said...

रांची विश्वविद्य़ालय की साइट मैंने दो-तीन बार जाति के हिसाब से टीचर और प्रोफेसरों की गनती मिलाने के लिए खोली थी। मैंने पाया कि लगभग पूरे विभाग में एससी,एसटी और ओबीसी लगभग नदारद है। नियुक्तियों को लेकर भारी गड़बड़ी है शायद। जेनरल की सीटों पर तो लोग विराजमान है लेकिन आनुपातिक तौर पर बाकी लोग नहीं है। आप इसे सरसरी नजर से देखें तो आपको अंदाजा मिल जाएगा।

..अभी दस दिन पहले रांची से लौटा हूं। बहुत जुगाड़ करके आपका नंबर लिया और कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा।..चलिए कभी बातें होंगी। http://taanabaana.blogspot.com
09811853307