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Wednesday, February 26, 2014

चिरकुट प्रजाति के बहुजन कारोबारी

मुद्दा जाति उन्मूलन का है, सत्ता में भागेदारी नहीं।

तमाम बहुजन चिन्तक और मसीहा कॉरपोरेट राज में बुराई नहीं देखते और इस आक्रामक ग्लोबीकरण को बहुजनों के लिये स्वर्णकाल मानते हैं।
कांशीराम जी ने जो सत्ता की चाबी ईजाद कर ली है, उसके बाद से निरंतर अंबेडकर हाशिये पर जाते रहे हैं और उनके जाति उन्मूलन के एजेण्डा अता पता नहीं है। सोशल इंजीनियरिंग की चुनावी राजनीति, अस्मिता और पहचान को पूँजी बनाकर पार्टीबद्ध राजनीति कॉरपोरेट राज का पर्याय बन गयी है।
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चिरकुट प्रजाति के बहुजन कारोबारी

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राष्ट्रवादी (!) संघ परिवार के प्रधानमंत्रित्व का चेहरा इतना राष्ट्रद्रोही !

संघ परिवार ने अपने लौह पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी, देश की इस वक्त की शायद सबसे बेहतरीन वक्ता सुषमा स्वराज, तीक्ष्ण दिमाग अरुण जेटली जैसे दिग्गजों को ठुकराकर नरेंद्र मोदी की तर्ज पर जिस अदूरदर्शी व्यक्ति को भारत के भावी प्रधानमंत्री बतौर पेश किया है, वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दों में ऐसे उलझ रहा है, जिसकी मिसाल नहीं है।
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राष्ट्रवादी (!) संघ परिवार के प्रधानमंत्रित्व का चेहरा इतना राष्ट्रद्रोही !


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Tuesday, November 12, 2013

लेखक को हर हाल में सच का साथ देना चाहिए- फहमीदा रियाज़

फहमीदा जी से बात करना पाकिस्तान के दुखद वर्तमान के सफ़र पर जाने जैसा है। अपने देश से प्यार उनकी रगों में बहता है। पाकिस्तान की जो खतरनाक तस्वीर हिन्दुस्तान में दिखाई जाती है दरअसल वह वैसा भी नहीं है। वह अपने ज़ख्मों से कराहता एक देश है। आप उनसे कोई भी सवाल कीजिये बात घूम फिर कर पाकिस्तान की बदहाली के राजनीतिक कारणों पर लौट आती है।
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लेखक को हर हाल में सच का साथ देना चाहिए- फहमीदा रियाज़