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Wednesday, February 26, 2014

राष्ट्रवादी (!) संघ परिवार के प्रधानमंत्रित्व का चेहरा इतना राष्ट्रद्रोही !

संघ परिवार ने अपने लौह पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी, देश की इस वक्त की शायद सबसे बेहतरीन वक्ता सुषमा स्वराज, तीक्ष्ण दिमाग अरुण जेटली जैसे दिग्गजों को ठुकराकर नरेंद्र मोदी की तर्ज पर जिस अदूरदर्शी व्यक्ति को भारत के भावी प्रधानमंत्री बतौर पेश किया है, वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दों में ऐसे उलझ रहा है, जिसकी मिसाल नहीं है।
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राष्ट्रवादी (!) संघ परिवार के प्रधानमंत्रित्व का चेहरा इतना राष्ट्रद्रोही !


http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6/2014/02/25/how-traitor-modi

Wednesday, October 23, 2013

आदिवासी और सामाजिक न्याय विरोधी है मोदी की राजनीति

अखिलेन्द्र ने कहा कि जिस मोदी के गुजरात माडल का देश में माहौल बनाया जा रहा है उसका मतलब कारपोरेट परस्त राज का है जिसमें किसानों और मजदूरों की बर्बादी ही होगी। मोदी की राजनीति आदिवासी और सामाजिक न्याय विरोधी भी है उनके गुजरात में एक लाख से भी ज्यादा वनाधिकार के दावे गैरकानूनी ढंग से निरस्त कर दिए गए और आदिवासी इलाके में देश में सबसे ज्यादा कुपोषण गुजरात में है, इसलिए

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आदिवासी और सामाजिक न्याय विरोधी है मोदी की राजनीति

Sunday, July 21, 2013

गरीब के बच्चे की रोटी में ज़हर न मिलने पाये

पने देश में राजनीतिक विमर्श की भाषा अजीब शकल अख्तियार कर रही है। विकास के कुछ माडलों की बातें की जा रही हैं। हालाँकि जिन राज्यों के मॉडल को विकास का उदाहरण बताया जाता है वे पूरी तरह से नाकाम मॉडल हैं लेकिन बातों को कौन रोक सकता है। गुजरात मॉडल की असफलता पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। नीतीश कुमार ने अपने आपको गुजरात के मुख्यमंत्री से ज्यादा काबिल बताया है और  विकास का बिहार मॉडल चर्चा के मैदान में डाल दिया है। यह भी उतना ही नाकाम है जितना गुजरात मॉडल। …और अब तो इतने बच्चों की मौत के बाद नीतीश कुमार को भी अपने गुजरात के साथी की तरह विकास के मॉडल की बात करना बन्द कर देना चाहिए और अपनी राजनीति को ऐसी दिशा में मोड़ने की कोशिश करनी चाहिए जिस से एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की दिशा में ज़रूरी क़दम उठाया जा सके।

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