
यह क्या नौटंकी है? कैसे होता है ये सब? आखिर मैं या मेरे जैसे लोग करें तो क्या? इसके लिये चुनाव आयोग से लेकर शासन तंत्र तक के किस जिम्मेवार तत्व को सजा मिलनी चाहिए। ऊपर गौर से देखिये, मेरा नाम मुकेश कुमार एंव मेरी पत्नी कुमारी आशा का मतदाता परिचय-पत्र है, जो आज ही चकला राजकीय विद्यालय, ओरमांझी के एक शिक्षक द्वारा बांटा गया है। इस पत्र का जो हाल है, उससे न तो मैं या मेरी पत्नी मतदान कर पायेंगे और न ही किसी अन्य सरकारी गैर सरकारी कार्यों में इस्तेमाल हो सकेगा। मेरा नाम हिन्दी में मुकेश कुमार(सही) एवं अंग्रेजी में राजेश कुमार (गलत) है। मेरे पिताजी का नाम हिन्दी में सियाशरण प्रसाद (सही) और अंग्रेजी में सिया प्रसाद (गलत) अंकित है। इसी तरह मेरी पत्नी का नाम हिन्दी में कुमारी आशा (सही) और अंग्रेजी में मधु देवी (गलत) है। इसमें पति के नाम पर वैसी ही हिन्दी अंग्रेजी वाली गलती है। अब आप ही बताइए, क्या हिन्दी में पति पत्नी का नाम अंग्रेजी में बदला हुआ कैसे हो सकता है। मैं यह सब बताने के लिए इसलिए बाध्य हूं क्योंकि पिछले तीन चार बार से मैं अपना और अपनी पत्नी का मतदाता पहचान पत्र पर सुधार करवा के थक चुका है। लेकिन नतीजा वहीं ढाक के तीन पात वाली है।
मुकेश कुमार
संचालक, सियाजी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एजुकेशन, सियाजी कम्युनिकेशन, एनएच-33, चकला मोड़, ओरमांझी, रांची। मो-9708570356, 0651-2576067 (फोन-फैक्स)













